हिन्दी साहित्य भूख एवं राजनीति
प्रोफेसर संतोष मोटवानी
आर के तलरेजा महाविद्यालय उल्हासनगर, महाराष्ट्र साहित्य मनुष्य के संपूर्ण जीवन का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है। मनुष्य की हर बात को वह अपने में समेटता है। जिसमें संस्कृति रीति रिवाज रहन-सहन आदि सब कुछ आ जाता है । भूख और राजनीति का बहुत गहरा संबंध है। जिसका बड़ा ही सुंदर चित्र सुदामा पांडे ‘धूमिल’ जी ने अपनी 'संसद और रोटी' कविता में किया है-
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